Thursday, August 15, 2019

बंधनों में बंधन - रक्षाबंधन

दुनिया में देखो भैया बंधन बहुत सारे
चारों ओर बंधनों का ही तो बोल बाला है ।
बंधन भी भिन्न-भिन्न कैटेगिरी के यहाँ पै
छोटे बड़े मोटे पतले सबका खज़ाना है ।।

इक माता दूजा पिता तीजा बंध बहिन का
चौथा ननिहाल पाँच दादा-दादी घर का ।
छठा गुरु सप्त मित्र अष्ट बंध दम्पति का
नौवाँ बंध अपना-अपना धन्धा-पानी घर का ।।

बंधनों में तीजा बंध रक्षाबंधन नाम पाया
भैया और दीदी ने हाँ रिश्ता निभाया ये ।
इसमें है प्यार बड़ा वात्सल्य साथ जुड़ा
जात पात भेदभाव सबको हराया ये ।।

दुनिया भी सुख और शांति को ही चाहती है
इसीकारण रक्षाबंधन सर्वोपरि आया है ।
बंधनों में ये है सर्वश्रेष्ठ बंध दुनिया का
सर्वधर्मियों ने बस ये ही अपनाया है ।।

सारे बंधनों को पूरी दुनिया ने मान लिया
बंध की ही कथा से तो विसंवाद फला है ।
बंधनों से पार एक आत्मा की शरण से
बंधनों से मुक्त देखो शिव पंथ भला है ।।

✍🏻 साकेत जैन शास्त्री 'सहज'

बीमारी अनेक, इलाज़ एक - भारत देश

वैसे दुनिया में देश तो बहुत सारे हैं ।
उनमें से कुछ आधे तो कुछ पूरे पागलपन से मतवाले  हैं ।

इस दुनिया के अधिकांशतः देश तो डर से पगला गए है और इसीकारण शायद हर देश में जनसंख्या से ज्यादा हथियार आ गये है ।

और जनाब हथियार भी कोइ एसे वैसे नहीं है एटम बम हैं एटम बम
जो दिखने में तो बहुत छोटा है
लेकिन यकीन मानिये कि सब हथियारों में सबसे ज्यादा खोटा है ।

और तो और ये अपने खोटेपन को बताने के लिए कुछ यूं है अड़ा
कि जो ये एक बार फटा तो दूसरे बम के लिए फिर कोइ ना बचा ।

और जब इस पागलपन को मिटाने की दवा मैंने खोजी
तब यह बात मेरे ख्याल में आयी कि इस पागलपन कि दवा आज की तारीख में सिर्फ एक ही देश में मौज़ूद है।

पर भली मेरी किस्मत, क्या करें ! बुरी संगत का असर ही कुछ ऎसा है
कि जिस देश के पास इसकी दवा है, वही इस रोग में फसा है ।

हाँलाकि उस देश की धरती के कण कण में आज भी,अभी भी इस रोग को मिटाने वाली दवा के तत्त्वों का वजूद है ।
बस जरूरत उसे पहचान कर अपनाने कि है वरना हम सबका वजूद भी खतरे की सीमा रेखा के अंदर ही मौज़ूद है ।

दोस्तो, वह दवा कुछ और नहीं मात्र प्रेम और विश्वास से भरी ५०० एम. एल. की मीठी गोली है
जो दुनियाभर के लिए मात्र भारत देश में आज भी मौज़ूद है ॥

✍🏻 साकेत जैन शास्त्री 'सहज'

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