Tuesday, January 1, 2019

नये वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ

दोस्तो ! कल मैंने अपने विचारों के रूप में आपके सामने राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर की कविता "ये नववर्ष हमें स्वीकार नहीं" प्रस्तुत की थी तो एक बच्चे ने मुझसे प्रश्न पूछा कि आखिर क्यों यह नववर्ष हमें स्वीकार नहीं है? 
आज इसी प्रश्न का उत्तर के रूप में अपने विचारों को आप सभी के समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ । कहां तक सही हूँ, नीचे कमेन्ट बॉक्स में कमेन्ट लिखकर जरूर अवगत कारायें ।

भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति ने प्राचीनकाल से ही उज्जवल पक्ष को न सिर्फ देखने का अपितु उसे ग्रहण करने का एक आदर्श कार्य पूरी दुनिया के सामने प्रस्तुत किया है ‌। 
फिर भी क्यों दिनकर ने ऐसा लिखा कि "ये नववर्ष हमें स्वीकार नहीं " क्या उन्हें भारतीय सभ्यता व संस्कृति के उज्जवल पक्ष को देखने की परम्परा का ज्ञान नहीं था ?

दरअसल उन्हें तो उज्जवल पक्ष देखने की परम्परा का ज्ञान था, पर गलती हमसे हुई जो हमने पश्चिमी नववर्ष को तो मनाया और हमारी अपनी भारतीय सभ्यता व संस्कृति में मनाया जाने वाला नववर्ष भूल ही गये, इसीकारण तो दिनकर को लिखना पड़ा कि -  "ये नववर्ष हमें स्वीकार नहीं । "

क्या है न, हम दूसरों का सम्मान करें समस्या इसमें नहीं है पर दूसरों सम्मान के चक्कर में अपनों का सम्मान तो छोड़ दें, उल्टा अपमान और कर बैठें तो दिनकर जैसे राष्ट्र कवि का यह कथन  कि -  "ये नववर्ष हमें स्वीकार नहीं । " उनके अंतर्मन की व्यथा को व्यक्त करता है ।

इसलिए पहले अपनी सभ्यता व संस्कृति का, अपनों का सम्मान करें और फिर दूसरों का भी सम्मान करें और इस महनीय परम्परा को अपनाते हुये हम पश्चिमी नववर्ष भी कुछ इसतरह मनाये, जिससे हमारी सभ्यता व संस्कृति का आदर्श पूरी दुनिया में पुनः प्रस्तुत व स्थापित कर सकें । तो आओ इस नववर्ष कुछ नया करते हैं, कुछ अच्छा करते हैं इसी मंगल भावना के साथ नये वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ ।

कमेन्ट बॉक्स में लिखकर जरूर बताए कि इस साल आप क्या नया और अच्छा करने वाले हैं ? 

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