Monday, May 6, 2019

जब हौंसला बना लिया है ऊँची उड़ान का, तो फिज़ूल है देखना कद आसमान का...... बच्चों जिन्दगी की असली उड़ान बाकी है.......इसलिए तैयार रहो.....

सभी साकेतियन्स और डाॅल्फिनाइट्स  के लिए साथ ही उनके अभिभावकों के लिए .........

आज 10वी का रिजल्ट आया, कुछ दिनों पहले 12वी क्लास का रिजल्ट आया । रिजल्ट में 95 % स्कोर करने वाले बच्चों के अभिभावक बड़े गर्व से उनका नाम और फोटो डाल रहे हैं । बहुत से मित्रों ने सीबीएसई  बोर्ड परीक्षा में अपने पुत्र-पुत्रियों को मिले गौरवशाली अंक साझा किए हैं-भला अपनी संतान की उल्लेखनीय सफलता पर किस माता-पिता को गर्व नहीं होगा? उनकी छाती चौड़ी नहीं होगी? ऐसे सभी सफल बच्चों और उनके माता-पिता को बहुत बहुत बधाई ।

लेकिन उनका क्या जिन बेचारे बच्चों ने 54 % स्कोर किया उनके अभिवावकों  के पास गर्व करने के लिए कुछ नहीं है क्या? ऐसे छात्र और छात्राएँ जो इस परीक्षा में अच्छे अंक नहीं ला सके -अपने माता-पिता की आशाओं और आकांक्षाओं पर खरा नहीं उतर सके-वे निश्चित ही निराश और हताश होंगे -हो सकता है उन्हें तरह तरह के तानों का भी सामना करना पड़ रहा हो - मेरी यह पोस्ट ऐसे ही छात्र-छात्राओं और अभिवावकों के लिए है :

1987 की बात है । Italy में रोम नगर में atheletics की world championships हो रही थीं ।
1500 मी की दौड़ में भारत का प्रतिनिधित्व कश्मीरा सिंह कर रहे थे ।
1500 मीटर की दौड़ में ट्रैक के कुल पौने चार चक्कर लगाने होते हैं । यानी पहले राउंड में कुल 300 मीटर और बाकी 3 राउंड में कुल 1200 मी ।
दौड़ शुरू हुई ........
कश्मीरा सिंह ने दौड़ शुरू होते ही बढ़त बना ली । ट्रैक पे लगभग 40 से ज़्यादा धावक दौड़ रहे थे । पर कश्मीरा सिंह सबसे आगे थे । कमेंटेटर ने बताया ....... india का athelete सबसे आगे चल रहा है .......
3 round तक कश्मीरा सिंह सबसे आगे चले । पर कमेंटेटर उनकी इस दौड़ से कतई इम्प्रेस नहीं था । वो पीछे चल रहे किन्ही दो अन्य धावकों पे निगाह रखे थे ।
बहरहाल चौथा और आखिरी राउंड शुरू हुआ । एक धावक बढ़ के कश्मीरा सिंह से आगे आ गया । और उसके बाद कश्मीरा सिंह उस भीड़ में खो गए और फिर कभी नहीं दिखे । बाद में जब हम लोगों ने record book देखी तो पता चला की शायद कश्मीरा सिंह 40 में से 38वे स्थान पे रहे ।

ज़िन्दगी की दौड़ में इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप पहले राउंड में आगे हैं कि नहीं । फर्क इस बात से पड़ता है कि finishing लाइन पे सबसे पहले कौन पहुंचा । उस दौड़ में सोमालिया के Abdi Bile फिनिशिंग लाइन पे सबसे पहले पहुंचे और उन्होंने Gold medal जीता ।
इतिहास में नाम Abdi Bile का दर्ज है न कि कश्मीरा सिंह का ।

मित्रों ...... अभी तो ज़िन्दगी की marathon दौड़ का बमुश्किल पहला राउंड पूरा हुआ है ....... फिनिशिंग लाइन पे न जाने कौन पहुंचेगा सबसे पहले । शुरू में बहुत तेज़ दौड़ने वाले ज़रूरी नहीं की इसी दमखम से लगे रहे ।
सबसे आगे वो आएगा जो धैर्य पूर्वक लगा रहेगा । जो बिना हार माने दौड़ता रहेगा । वो जिसकी निगाह लक्ष्य पे रहेगी ।

जीतना ज़रूरी भी नहीं । मज़ा दौड़ पूरी करने में भी है ।

ज़िन्दगी की दौड़ में अक्सर 54 % भी जीतते हैं ।

याद रखना chinese bamboo ....... सबसे देरी से उगता है पर उगते ही 7 हफ्ते में 40 फुट का हो जाता है।
दौड़ते रहो .......
रुकना मत .....

✍🏻 अज्ञात

1 comment:

  1. अरे वाह शानदार
    जल्द ही हम भी इसपर लिखेंगे पत्र लिखने वाले हैं🙈

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