माँ,
वास्तव में कॊन है माँ ?
दरअसल सच कहूं ,
तो एक नहीं दो है माँ
बस थोड़ा सा अन्तर है वो ये कि
पहली हमें इस संसार में लाती है
वास्तव में कॊन है माँ ?
दरअसल सच कहूं ,
तो एक नहीं दो है माँ
बस थोड़ा सा अन्तर है वो ये कि
पहली हमें इस संसार में लाती है
दूसरी हमें इस संसार से ले जाती है।
पहली हमें इस संसार में आगे बढ़ाती है
दूसरी हमें इस संसार से आगे बढ़ाती है ।
पहली हमारे दर्द को दबाती है
दूसरी हमारे दर्द को मिटाती है ।
पहली हमें सुलाती है
दूसरी हमें जगाती है ।
पहली तो किसी एक-दो की होती है माँ
पर दूसरी तो जग भर की होती है माँ।
पहली संसार में एक-दो को लाती है
पर दूसरी संसार से अनंतों को ले जाती है।
पहली हमें इस संसार में आगे बढ़ाती है
दूसरी हमें इस संसार से आगे बढ़ाती है ।
पहली हमारे दर्द को दबाती है
दूसरी हमारे दर्द को मिटाती है ।
पहली हमें सुलाती है
दूसरी हमें जगाती है ।
पहली तो किसी एक-दो की होती है माँ
पर दूसरी तो जग भर की होती है माँ।
पहली संसार में एक-दो को लाती है
पर दूसरी संसार से अनंतों को ले जाती है।
✍🏻 साकेत जैन शास्त्री 'सहज'
Kya baat hair sir.. Bahut khoob
ReplyDeleteशुक्रिया सर जी
DeleteToo good.
ReplyDeleteKeep going on
Thanks sir
DeleteBahut khoob saket ji
ReplyDeleteशुक्रिया
DeleteBahut Hi Shaandar...
ReplyDeleteधन्यवाद
DeleteMst ha sir
ReplyDeleteZakas ha sirji
ReplyDeleteBahut badiya sir ji
ReplyDeleteThanks sir ji
DeleteKya bat
ReplyDeleteWah Bhai kya baat hai
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