Monday, January 14, 2019

शायद इसलिए हिन्दी भाषा............

हिन्दी दुनिया की सबसे अधिक व्यवहारिक भाषा है । अब देखिये न, अंग तक का नामकरण भी अंग की उपयोगिता के आधार पर होता है। उदाहरण देख लीजिए -

छू लो तो चरण, 
लटकती दिख जाएं तो टाँग, 
कुल्हाड़ी मारनी हो तो पैर, 
बढ़ाना हो तो कदम, 
चिह्न छोड़े तो पद, 
फूलने लगें तो पाँव, 
प्रभु के हों तो पाद, 
पिताजी की हो तो लात, 
घुंघरू बाँध दो तो पग, 
बीच में अड़ा दो तो टंगड़ी...
इतनी सरल एवं उपयोगी भाषा आपने न देखी होगी। 

लेकिन इस प्रसंग में अंग्रेजी के अन्दर केवल एक ही शब्द है 'LEG'.

दोस्तों, वैसे तो यह संदेश कभी Whatsapp पर पढ़ा था, लेकिन इसे पढ़कर यह बात एकदम स्पष्ट हो जाती है कि अंग्रेजी भाषा से अपने आप को बड़ा और हिन्दी भाषा से अपने को छोटा मानने वाले वे तमाम भारतवासी सिर्फ 'दूर के ढोल सुहावने' इस उक्ति के आधार पर ही, अभी तक चल रहें हैं । अतः यदि ईमानदारी से इस बात पर विचार किया जाये तो यह एहसास होगा की हिन्दी भाषा गर्व करने योग्य है ।

इसलिए यह बात ध्यान रखना कि हिन्दी अपनी भाषा है, इसकी कद्र करें, इस पर गर्व करें वरना कहीं ऐसा न हो जाए कि इसके साथ-साथ हमारा अपना अस्तित्व भी खो जाए ।

✍🏻 साकेत जैन शास्त्री 'सहज'

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