रंगत रंगों से नहीं मन की उमंगों से आती है,
और मन की उमंग हुड़दंगों से नहीं सत्संगों से आती है ।
होली पर दहन करना है तो मन की कलुषता का करें,
रंग रंगना है तो रंग सद्भावना का रंगे ।
क्योंकि मन में खुशी हो तो लबो पर मुस्कुराहट आती है ।
और ये मुस्कुराहट ही तो है जो जीवन में असली रंग लाती है ।
✍🏻 साकेत जैन शास्त्री 'सहज'
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