Friday, January 18, 2019

दोहावली २ : वस्तु व्यवस्था एवं वस्तु स्वरूप पर आधारित

मैं अनादि से हूँ सदा, चेतन तत्व महान ।
फिर भी तन क्यूँ साथ में ?, बोलो सकल जहान 

हो अनादि से तन सहित, यूँ तुम चेतनराय ।
वस्तु व्यवस्था को अभी, समझ नहीं तुम पाय 

मिलते जो संयोग हैं, अच्छे बुरे अनेक ।
कैसी सुंदर है कहो, वस्तु व्यवस्था नेक 

मिला अनादि से तुम्हें, काया का संयोग ।
यह भी निश्चित मानना, वस्तु व्यवस्था योग ॥

वस्तु व्यवस्था जान ली, जानो वस्तु स्वरूप ।
आगे के दोहे पढ़ो, मिलेगा सुंदर रूप ॥

हैं अनादि से साथ में, तन और चेतनराज ।
फिर भी तन तन में रहा, चेतन चेतन साथ ॥

तन चेतन न हो सका, न चेतन तन रूप ।
इतना प्यारा देख लो, है यह वस्तु स्वरूप ॥

वस्तु व्यवस्था को कभी, समझ नहीं हम पाय ।
इससे ही दूषित हमें, वस्तु स्वरूप दिखाय ॥

दोनों का समझा यहाँ, मैंने सही स्वरूप ।
दुखी नहीं अब इसलिये, सहज परम सुख रूप ॥

✍🏻 साकेत जैन शास्त्री 'सहज'

3 comments:

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